मिट्टी की सहेलियाँ (Hindi Poem)

मिट्टी हूँ मैं, मिट्टी हो तुम,हवाओं से कह दो कर दे हमें गुम।मैं काली बनूँ तुम लाल बनो,मोहलत को जो रहे वो मलाल बनो। मैं खाद बनूँ तुम बाग़ बनो,खेतों से आए वो राग बनो।मैं लिपटी मिलूँ कुल्हाड़ी मेंतुम फसलों की पलंग बन जाना,चाहे चोट कितनी भी खानी पड़ेबंजर ज़मीं ना तुम कहलाना। मिलेंगे लहरोंContinue reading “मिट्टी की सहेलियाँ (Hindi Poem)”

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